Showing posts with label इज्जत. Show all posts
Showing posts with label इज्जत. Show all posts

Sunday, November 10, 2013

dil bekaraar hi na karoon.............


Teri bewafaai mein dil bekaraar hi na karoon,
Tu hukm de to tera intezaar hi na karoon,

Tu bewafa hai to kuch iss kadar bewafaai kar,
Ke tere baad main kisi aur se pyaar hi na karoon…....

Monday, October 7, 2013

कुछ और मांग मेरा हाथ मांगने वाले...

मेरा कलम मेरे ज़ज्बात मांगने वाले... 
कुछ और मांग मेरा हाथ मांगने वाले... 

तमाम गाँव तेरे भोलेपन पे हसता है, 
धुएं के अब्र से बरसात मांगने वाले... 


ये लोग कैसे अचानक अमीर बन बैठे, 
ये सब थे भीक मेरे साथ मांगने वाले... 

कलेजा चाहिए जीने को ऐसे जंगल में, 
कुछ और मांग मेरी रात मांगने वाले... 

कभी बसंत में प्यासी जड़ों की चीख भी सुन, 
लुटे शज़र से हरे पात मांगने वाले...

Monday, September 30, 2013

Chaahat Ke Yeh Kaise Afsane

Chaahat Ke Yeh Kaise Afsane Huye,
Khud Nazron Mein Apni Begane Huye,
Kisi Bhi Riste Ka Khayal Nahi Mujhe,
Ishq Mein Tere Is Kadar Diwaane Huye…

Tuesday, June 25, 2013

hum yaad to aayenge...............

Hamare sath beete lamhoo ki yaade sambhal ke rakhna.....

kynuki phir hum yaad to aayenge par lot ke kabi nahi aayenge...;

Thursday, April 18, 2013

उसी गाँव में चलते है.....


बड़ा भोला बड़ा सादा बड़ा सच्चा है।
तेरे शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है॥
वहां मैं मेरे बाप के नाम से जाना जाता हूँ।
और यहाँ मकान नंबर से पहचाना जाता हूँ॥
वहां फटे कपड़ो में भी तन को ढापा जाता है।
यहाँ खुले बदन पे टैटू छापा जाता है॥
यहाँ कोठी है बंगले है और कार है।
वहां परिवार है और संस्कार है॥
यहाँ चीखो की आवाजे दीवारों से टकराती है।
वहां दुसरो की सिसकिया भी सुनी जाती है॥
यहाँ शोर शराबे में मैं कही खो जाता हूँ।
वहां टूटी खटिया पर भी आराम से सो जाता हूँ॥
यहाँ रात को बहार निकलने में दहशत है...
मत समझो कम हमें की हम गाँव से आये है।
तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है॥
वह इज्जत में सर सूरज की तरह ढलते है।
चल आज हम उसी गाँव में चलते है.....