Wednesday, February 17, 2016

वादों से मुकर जाना............


औरों के लिए जीना, अपने लिए मर जाना..
यूँ टूटते रहने से, बेहतर है बिखर जाना...,

..अब जाके खुला मुझ पर, उसकी तो ये आदत है..

वादों से मुकर जाना, राहों से बिछड़ जाना....

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