Wednesday, September 19, 2018

फ़िराक़-ए-यार


फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा

कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा

✍️ राहुल


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