Tuesday, January 12, 2021

कारीगर हूं साहेब


*कारीगर हूं साहेब शब्दों की मिट्टी से महफ़िल सजाती हूँ....*
*किसी को बेकार, किसी को लाजवाब नज़र आती हूं.....*

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