Monday, February 16, 2015

तू कितना अपना है

ना जाने क्या कशिश है तेरे ख्यालों में , 
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तू गैर हो के
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भी कितना अपना है

उसका प्यार अब तक मुरझाया नही....

मेरी किताबों में रखा गुलाब..वो ..चुपके-चुपके रोज़ बदल देता था......
और में पगली समझती थी उसका प्यार अब तक मुरझाया नही....

Meri Kahani Likhna...


Mere Marnay K Baad Meri Kahani Likhna...
Kaise Barbaad Hui
Meri Jawaani Likhna...

<3 <3 <3 <3 <3 <3 
Or Likhna K Mere
Hont Khushi Ko
Tarsay...
Kaise Barsaa Meri
Aankhon Se Paani
Likhna...

Or Likhna K Usay
Intzaar To Buhat
Thaa Tera...
Aakhri Sanson Mein Wo Hichkiyon Ki Rawaani Likhna...

Likhna K Martay
Waqat Bhi Deta Tha "DUA" TuJh Ko.,
Haath Bahir Thy
Qafan Se Ye Nishaani Likhna......

जीने में बनावट सी नज़र आती है.

बातों में बनावट सी नज़र आती है
मतलब की मिलावट सी नज़र आती है
फिर देखे मिरा रक़ीब तिरछी नज़र से
आँखों में लगावट सी नज़र आती है
जाने किस ज़माने का ख़त निकाला है
अपनी ही लिखावट सी नज़र आती है
कोई मान ले शायद रौब पैसे का
पारटियां भी दिखावट सी नज़र आती है
निकला देर का है घर से परिन्दा वो
कदमों में थकावट सी नज़र आती है
मुराद हो गई पूरी आज शायद
चौखट पे सजावट सी नज़र आती है
कैसे कट रहा है' वक़्त ना पूछो
जीने में बनावट सी नज़र आती है.

Sunday, February 8, 2015

Koi teri khaatir hai jee raha..

Baatein yeh kabhi na tu bhoolna 
Koi teri khaatir hai jee raha
Jaaye tu kahin bhi ye sochna 

Koi teri khaatir hai jee raha..