Saturday, January 30, 2021

सारे आप के.!

कैसा जादू है समझ आता नहीं 
नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के.!


Wednesday, January 27, 2021

हम देख लेते हैं उसे जी भर कर.....




“ठिकाने बना लिए है हमने अब उसके रास्तों पर...,

वो देखे ना देखे...हम देख लेते हैं उसे जी भर कर।”

Tuesday, January 26, 2021

खुद ही संभल जाऊं तो बेहतर है

“यह दिल कहता है तेरे शहर में ठहर जाऊं, मगर हालात कहते हैं कि घर जाऊं तो बेहतर है। दिलों में फर्क आएंगे...ताल्लुक भी टूट जाएंगे, जो देखा जो सुना उससे मुकर जाऊं तो बेहतर है। यहां है कौन मेरा जो मुझे समझे मैं कोशिश करके, खुद ही संभल जाऊं तो बेहतर है ।”

सिर्फ पागलपन ही दिखता है ना मेरा?

“सिर्फ पागलपन ही दिखता है ना मेरा? पर उसके छीपे मेरे प्यार का क्या? एक आवारा जो चले लगा था संभलकर, मेरा टूटा हुआ कोना जो तेरे आने से हुआ था घर। मेरी उस दुनिया-संसार का क्या? जिसकी दवा ही हो सिर्फ साथ तुम्हारा, उस बिचारे बिमार का क्या?”

फिर मिलेंगे साजना

“ज़िंदगी रही तो फिर मिलेंगे साजना, पर वादा कोई नही कर सकते...मौत का सिज़न चल रहा है।”