Sunday, February 8, 2015

Na koi mausam tumse accha O.. na koi manzar tumse accha Haan rehna hai sang re..

O tum bin main dekho toh
Kya se kya ho baitha
Tum ko jo khoya toh, khudko bhi kho baitha
Mujhko jo dhoonde, khudko main paa lunga
Main tere badle mein jannat bhi na lunga
Tum todo na dil mera...

Sapno ke bin aankhon ki jaise keemat koi na
Waise hoon main tere bin, meri chahat koi na
Dardon ke ek kehna hai
Saansein jisko kehta hoon
Teri soorat marham hai
Dooji raahat koi na........

Thursday, February 5, 2015

Dedicated to all the "गली के टपोरी's"


शक्ल सुरत देखी नही
ना देखा कभी आईना
जब भी गली से गुजरता है
कहता है मै हु ना। 
ना भाव देती है चंद्रमुखी 
ना घास डालती है पारो
फीर भी style मे कहता है
जानम समझा करो। 
सडकछाप jeans पहनके
मुँह मे चबाता है chewing gum
हरकते है टपोरी जैसी
पर खुदको समझता है सिंघम। 
आँख मारके बोलता है
रानी कुछ कुछ होता है
भैया से मार पडी तो
पैर पकड़ के रोता है। 
हवा मे उडाके Bike
कहता है धूम मचाले
अरे आवारा लड़के
पहले फुटी कौडी कमाले।
वाह रे गली के आंशिक
तुझे तो इसीमे मजा है
पर तेरी गंदी हरकते
हर लड़की के लिए सजा है। 
लड़की पर गंदी बाते
ये मस्ती नही होती
कीसी भी लड़की की ईज्जत
इतनी सस्ती नही होती। 
एक बार सोचके देख
बदल के देख ये रवैया
कीसी छोटीसी बहन का तो
तु भी होगा भैया। 
अब तक चाहे गलत था
अब तो कुछ सीखले
मुश्किल नही है कुछ भी
खुद को बदल के देखले।
औरत की इज्जत करके देख
तुझे इज्जत मील जाएगी
जन्नत जानेकी सीडी
तेरे सामने खुल जाएगी। 

Tuesday, February 3, 2015

बहुत कुछ बदला हैं...................

बहुत कुछ बदला हैं मैने अपने आप में,लेकिन...!तुम्हें वो टूट कर चाहने की आदतअब तक नहीं बदली !!

अजीब सा मोड़ है ज़िन्दगी का

अजीब सा मोड़ है ज़िन्दगी का , मुशिकलों की ज़मीन आफतों का आसमान है ।
............................................तू जो नही है साथ मेरे इस राह मैं तो यही जमीन मेरा समशान है

Wednesday, January 28, 2015

घर की याद आई................

गगन में चंद्रमा है , चांदनी फैली चारों ओर ।

आधी रात में आई मेरे प्यारे घर की याद ।

रात भर सुनाई दी तोपों की आवाज ,

हर जगह धधकती धुआं अग्नि ।

दुश्मन के पंजों से भाग निकला ,

भटता फिरता दूर दराज समुद्र पारी ।

घर में वृद्ध वृद्धा तड़पती मेरी मां ,

दूर प्रदेश चले पुत्र की स्मृति सताई ।

गंगन में चमकता ठंडा चांद है ,

रात गहरी , घर की याद आई ।